मोना लिसा की पेंटिंग | Monalisa painting in hindi

यदि आपसे बोला जाये कि आप एक पेंटिंग पाकर दुनिया के एक बहुत अमीर इन्सान बन सकते हो तो यह कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा। दुनिया में कुछ ऐसी ही कलाकृति (आर्टवर्क) का नजारा देखने को मिलता है। जिनका कोई मूल्य नहीं है। जिन्हें देख और सुन हम रोमांचित हो उठते हैं। ऐसा ही कुछ आप यहाँ मोना लिसा की पेंटिंग | Monalisa painting in hindi के बारे में जानने वाले हैं। जो दुनिया की सबसे रहस्यमयी, मशहूर और मंहगी पेंटिंग हैं।

इतिहासिक चीजों की जब भी बात होती है, तो उसमे जानकारों के अलग-अलग मत होते हैं। लेकिन आप इस आर्टिकल के अंत तक, इस पेंटिंग के बारे में लगभग-लगभग सटीक जानकारी पढेंगे। हम आशा करते हैं कि आप इस पेंटिंग में छिपे रहस्मयी राजों के रोचक तथ्यों को अंत तक पढकर जरूर रोमांचित होंगे।

‘मोना लिसा’ पेंटिंग की रहस्यमयी कहानी | Monalisa painting in hindi

विश्व प्रसिद्ध ‘मोना लिसा’ (Monalisa) की पेटिंग को आज से लगभग 500 वर्ष पहले जीनियस लिओनार्दो दा विंची (Leonardo Da Vinci) ने आयल पेंट से पोपलर-लकड़ी के बोर्ड पर बनाया था। जो अभी पेरिस के लोउव्रे म्यूजियम’ (Louvre Museum) में प्रदर्शनी के लिए रखी हुई है। ‘मोना लिसा’ की पेंटिंग (Mona Lisa Painting) अपनी बनावट के कारण पूरे दुनिया में लोकप्रिय है क्योंकि यह पेंटिंग हर एक एंगल से देखने पर अलग तरीके से दिखाई देती है। इस पेंटिंग का सबसे बड़ा राज इसमें बनी औरत की मुस्कान का है। इसमें जो महिला हैं; उसके चेहरे पर तो मुस्कान है लेकिन आँखों में दुःख दिखाई देता है।

दुनियाभर के जानकरों के मुताबिक इस 500 साल पुरानी पेंटिंग में बहुत सारे राज छुपे हुए हैं। जिसमे हमेशा से रिसर्च होती रही है कि इस पेंटिंग में आखिरकार कौन औरत है? और यह भी एक बहुत बड़ा कारण है जोकि इस पेंटिंग को दुनियाभर में बहुप्रसिद्ध बनाता है।  

Monalisa painting और भी ज्यादा मशहूर तब हो गई, जब इसे पेरिस के ‘लोउव्रे म्यूजियम’ से 21 अगस्त, 1911 में एक म्यूजियम के कर्मचारी के द्वारा चुरा लिया गया था। इस पेंटिंग को चुराने वाले का नाम विनसेंजो पेरुग्गिया (vincenzo peruggia) था जोकि इटली का ही नागरिक था। उसका मानना था कि लिओनार्दो दा विंची इटली के नागरिक थे और उनसे यह पेंटिंग Monalisa painting किंग फ्रांसीसियों ने ले ली थी। इसलिए इसे वापिस इटली में होना चाहिए। लेकिन दो साल बाद इस पेंटिंग को वापिस ढून्ढ लिया गया था और विनसेंजो पेरुग्गिया को 6 महीने की जेल भी हुई थी। 

मोनालिसा की पेंटिंग किसने बनाई थी | Monalisa painting kisne banai

लिओनार्दो दा विंची का जन्म 15 अप्रैल, 1452 में इटली के विन्ची नामक जगह पर हुआ था। लिओनार्दो दा विंची एक पेंटर होने के साथ-साथ एक लेखक भी थे। जानकारों के मुताबिक लिओनार्दो ने ‘मोना लिसा’ की पेंटिंग को 1503 में बनाना शुरू किया था और 1519 अपनी म्रत्यु तक इस पर काम किया था। लिओनार्दो ने ‘मोना लिसा’ की पेंटिंग (Monalisa photo) बनाने में 30 से भी ज्यादा परतों का इस्तेमाल किया था। जिसमे कई परते तो इंसानी बाल से भी पतली थीं। उन्होंने इस पेंटिंग को इतनी खूबसूरती से बनाया है की इस पर ब्रुश का एक भी निशान देख पाना बहुत ही मुश्किल है। इस पेंटिंग का साइज़ 30×21 इंच का है और 8 किलोग्राम बजन है।  

मोना लिसा पेंटिंग के रोचक तथ्य | Monalisa painting facts in hindi

1 – ‘मोना लिसा’ Monalisa की तस्वीर शुरू में देखने पर मुस्कुराती हुई दिखती है। बाद में फीकी पड़ने लगती है और फिर गायब ही हो जाती है। रिसर्चर कहते हैं कि इस पेंटिंग में बनी औरत अपने अंदर कुछ राज छुपाये हुए है।

2 – एक रिसर्चर के मुताबिक तो इस तस्वीर में बनी ‘मोना लिसा’ के दो दांत टूटे हुए हैं, जिसके कारण उनके होंठ दबने से चहरे पर मुस्कान दिखाई देती है।

3 – हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के न्यूरो साइंटिस्ट डॉ0 मार्गेट ने सन 2000 में बताया था कि ‘मोना लिसा’ की मुस्कान नहीं बदलती है वल्कि देखने वाले का माइंडसेट बदल जाता है क्योंकि वह उस पेंटिंग के बारे में पहले ही सबकुछ जान लेता है।

4 – ‘मोना लिसा’ की एक जुड़वाँ पेंटिंग भी मौजूद है जोकि असल पेंटिंग की तरह ही दिखती है। इस पेंटिंग को विन्ची के ही स्टूडेंट फ्रांसेस्को मेल्ज़ी (Francesco melzi) ने बनाया था जोकि स्पेन की राजधानी मेड्रिड के प्रादों म्यूजियम में रखी हुई है।  

5 – ‘मोना लिसा’ की तस्वीर को टूरिस्ट के द्वारा कई बार हानि पहुँचाने की कोशिश भी की जा चुकी है। जिसमे बोल्वियन टूरिस्ट ने पत्थर फेंका था और कईयों ने एसिड और रेड स्प्रे आदि से हानि पहुंचाने की कोशिश करी थी। इन सभी चीजों को देख इस पेंटिंग की सुरक्षा के लिए इसे बुलेट प्रूफ शीशे के पीछे रखा गया है।  

6 – फ्रांस के रिसर्चर पास्कल ने हाई रेज्यूलेशन स्कैन से पता लगाया था कि लिओनार्दो दा विंची ने ‘मोना लिसा’ की भोंहे बनाई थीं। लेकिन ओवर क्लानिंग के चलते ये गायब हो गई है।

7 – अमेरिकन ऑथर डेंन ब्राउन ने 2003 में कई वर्ष रिसर्च करने के बाद उनका एक नोबेल प्रकाशित हुआ था। जिसका नाम THE VINCI CODE था और बाद में इसी नाम से एक मूवी भी बनी थी। इन दोनों में पेंटिंग में छिपे सीक्रेट कोड के बारे में दर्शाया गया है।   

8 – इटालियन आर्ट हिस्टोरियन सिल्वानो विन्सेती (Silvano Vinceti) ने 2010 में दावा किया किया था कि ‘मोना लिसा’ (Monalisa) की आँखों में बहुत छोटे अक्षर छपे हुए हैं। जिन्हें मेग्नीफयिंग ग्लास के जरिये देखा जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया था कि दायीं आँख पर LV लिखा है।जिसका मतलब लिओनार्दो दा विंची हो सकता है। और बायीं आँख पर CE और V लिखा है। जिसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।

9 – इटली के महान लिओनार्दो दा विंची की पेंटिंग इटली में इसलिए नहीं है क्योंकि फ्रांस के किंग फ्रांसिस 1 के निमंत्रण पर विंची अपनी इस पेंटिंग के साथ फ्रांस चले गए। और वहीं उन्होंने इस तस्वीर पर काम किया। 1519 में उनकी म्रत्यु के बाद ये पेंटिंग उनके छात्र सलाई (Salai) को सोंप दी गई थी और उसने इसे किंग फ्रांसिस को बेच दिया था। और तभी से यह पेटिंग फ्रांस में ही है।  

तो दोस्तों यहाँ तक इस लेख को पढकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मोना लिसा की पेंटिंग | Monalisa painting in hindi का इतिहास कितना रोचक है।

इसे भी जाने: मदर टेरेसा की की जीवनी जो हमें बहुत अधिक प्रेरित करती है।

‘मोना लिसा’ पेटिंग की कीमत | Monalisa painting price

यह तो आप जान ही चुके हो कि ‘मोना लिसा’ की पेंटिंग (Monalisa painting) दुनिया की सबसे मंहगी पेंटिंग है। और इतिहासिक और अनमोल चीजों की कीमत अमूल्य होती है। लेकिन मोना लिसा की पेंटिंग की कीमत 1962 में $100 मिलियन आंकी गई थी और 2019 आते-आते इसकी कीमत $700 मिलियन हो गई। 2021 के मुताबिक ‘मोना लिसा’ पेंटिंग की कीमत (Monalisa painting price) $850 मिलियन है। बता दें कि इस पेंटिंग की कीमत कोई मायने नहीं रखती है क्योंकि इसे बेचा और खरीदा नहीं जा सकता है।  

मोना लिसा की पेंटिंग में क्या खास है | Why monalisa painting is famous

यदि ‘मोना लिसा’ (Monalisa) की पेंटिंग की बात करें तो यह सेकड़ों वर्ष पुरानी तस्वीर बहुत ही खाश है और यकीनन दुनिया की सबसे बेहतरीन मोना लिसा की पेंटिंग | Monalisa painting in hindi है। मोनालिसा की तस्वीर से पहले जो पोर्टरेट बनते थे। वह सिंपल प्रोफाइल होते थे और काफी अवास्तविक लगते थे। लेकिन ‘मोना लिसा’ की तस्वीर फ्रंट पोज में होने के साथ-साथ बहुत ही वास्तविक लगती है और यही चीज इसे बहुत ही खास बनाती है। 

Monalisa painting को बनाने के लिए लिओनार्दो दा विंची ने एक बहुत ही खास तकनीक का इस्तेमाल किया था। जिसे स्फूमाटो (Sfumato) कहते हैं। इस तकनीक में रंगों को इतने बारीक से मिला दिया जाता है कि ब्रुश के निशान और आउटलाइन्स को देखना बहुत ही मुश्किल है। और इसी बजह से यह पेंटिग में ‘मोना लिसा’ जीवित और रहस्मयी दिखाई देती हैं। विंची ने इस तस्वीर को और भी ज्यादा रियल बनाने के लिए पीछे बैकग्राउंड की बारीकियों को बहुत हल्का बना दिया था। जोकि उस समय के पेंटर बिलकुल भी नहीं करते थे। इसके बाद बहुत से पेंटर ने विंची के स्टाइल को कॉपी भी किया था।   

इसके अलावा इस पेंटिंग का सबसे बड़ा रहस्य यह भी है कि इसमें बनी औरत कौन है? कुछ जानकर कहते हैं कि इसमें बनी औरत लिसा घेरार्दिनी डेल जिओकोंडो (Lisa Gherardini Del Giocondo) है। और कुछ कहते हैं कि विंची ने इसमें खुद का सेल्फ पार्टरेट बनाया है तो कुछ कहते हैं कि उन्होंने इसमें अपनी माँ को बनाया है।

क्या पेरिस के म्यूजियम में रखी पेंटिंग ‘मोना लिसा’ की ही है?

‘मोना लिसा’ की पेंटिंग के खोज के आधार पर बहुत सारे अनुमान लगाये जाते हैं। लेकिन सच जानने के लिए हमें लिओनार्दो दा विंची के समय में 500 साल पीछे जाना पड़ेगा –

‘मोना लिसा’ की तस्वीर की सबसे पुरानी जानकारी लिओनार्दो दा विंची के छात्र सलाई के निजी पत्रों से मिलती है। सलाई ने अपने पत्रों में लिखा है कि 1524 में उनके पास ‘ला जिओकोंडो’ नाम की एक पेंटिंग थी। जो लिओनार्दो दा विंची ने मरते वक़्त सलाई को सौंपी थी। सलाई ने अपने पत्रों में ‘मोना लिसा’ का कहीं भी जिक्र नहीं किया है। तो यह सवाल उठता है कि सलाई जिस पेंटिंग की बात कर रहे हैं। क्या वह यही पेंटिंग है?

इटालियन आर्ट हिस्टोरियन जिओर्जियो वसारी (Giorgio Vasari) ने 1550 में लिओनार्दो दा विंची की बायोग्राफी लिखी थी। और उसी बायोग्राफी में हमें पहली बार ‘मोना लिसा’ का नाम सुनने को मिलता है। वसारी लिखते हैं कि लिओनार्दो दा विंची ने एक फ्लोरेंस के नागरिक फ्रांसेस्को डेल जिओकोंडो (Francesco Del Giocondo) की पत्नी ‘मोना लिसा’ (Mona Lisa) की तस्वीर बनाई थी। इटालियन भाषा में मोना का मतलब मैडम या माय लेडी होता है। बहुत से स्कॉलर का यह भी मत है कि वसारी की बातों पर आसानी से विस्वास नहीं किया जा सकता है क्योंकि उन्होंने यह बायोग्राफी विन्ची के मौत के 31 साल बाद लिखी थी।    

2005 में जर्मनी के HEIDELBERG UNIVERSITY के एक स्कॉलर ने एक 500 साल पुरानी किताब के अन्दर एक छोटा सा हैण्ड रिटेन नोट खोज निकाला था। यह नोट 1503 में लिओनार्दो दा विंची के ही समय के एक व्यक्ति अगोस्तिनो वेस्पुस्सी (Agostino Vespucci) ने लिखा था। इस नोट में यह लिखा था कि 1503 में विन्ची लिसा डेलकोंडो नाम की लेडी की पेंटिंग बना रहे थे। तो यहाँ लगभग साबित हो जाता है कि यह पेंटिंग ‘फ्लोरेंस फ्रांसेस्को डेल जिओकोंडो’ की पत्नी ‘लिसा डेल जिओकोंडो (मोना लिसा)’ की ही है।

‘मोना लिसा’ की तस्वीर का सच | Truth about Monalisa

उपर्युक्त तथ्यों से सिद्ध होता है कि यह पेंटिंग ‘मोना लिसा’ की ही है। लेकिन फिर भी ‘लोउव्रे म्यूजियम’ में रखी पेंटिंग सच में ‘मोना लिसा’ की ही है?

तो नहीं! जिसे हम सालों से ‘मोना लिसा’ की पेंटिंग समझते आये हैं; वह असल ‘मोना लिसा’ की नही है।

कुछ ही वर्ष पहले हमें एक ऐसा जानकारी मिली है जो ‘लोउव्रे म्यूजियम’ में रखी ‘मोना लिसा’ की पेंटिंग से बहुत बड़ा राज उजागर करती है।

फ्रांसीसी सरकार ने 2004 में फ्रेंच वैज्ञानिक पास्कल कोट (Pascal Cotte) को ‘मोना लिसा’ की पेंटिंग पर अध्ययन करने की अनुमति दे दी। इसके बाद पास्कल ने अगले 10 साल तक इस पेंटिंग पर रिसर्च की और उन्होंने लेयर एम्प्लीफिकेशन तकनीक से ‘मोना लिसा’ तस्वीर की कई लेयर को स्कैन किया।

पास्कल ने अपनी अध्ययन में पाया कि मोनालिसा की पेंटिंग के सरफेस के नीचे एक और पेंटिंग छिपी हुई है। जो पूरी पार्टरेट पेंटिंग ओरिजिनल मोनालिसा से बिलकुल ही अलग है। और उसके चेहरे पर मुस्कान भी नहीं है। पास्कल ‘मोना लिसा’ की पेंटिंग के सरफेस के नीचे बनी दूसरी पेंटिंग को डिजिटल इमेज बनाने में सफल हो गए। जो असल पेंटिंग से बिलकुल ही अलग थी। इसके बाद एक्सपर्ट मानने लगे कि विन्ची के द्वारा मोनालिसा के दो बर्जन बनाए है।

और अच्छे से जानने के लिए एक बार फिर से लिओनार्दो दा विंची के समय में वापिस से चलते है। –

लिओनार्दो डा विन्ची के समय के राफेल (Raphael) जोकि एक पेंटर थे। उन्होंने 1504 में ‘मोना लिसा’ पेंटिंग की नक़ल बनाई थी जो अभी की ओरिजिनली पेंटिंग से बिलकुल अलग थी। और इसी कारण एक्सपर्ट शुरू से ही कहते थे कि लिओनार्दो दा विंची ने मोनालिसा (Monalisa) के दो बर्जन बनाए थे। 

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अब पास्कल की डिस्कवरी की और चलते हैं तो पास्कल को मोनालिसा पेंटिंग के सरफेस के नीचे जो डिजिटल पेंटिंग मिली थी। वह राफेल की पेंटिंग से बिलकुल मिलती-जुलती थी। मतलब दोनों पेंटिंग एक जैसी ही दिख रही थीं और इसके बाद पास्कल ने कहा की शायद राफेल ने मोनालिसा का दूसरा वर्जन इसी पेंटिंग को देखकर बनाया होगा।

तो यह सवाल उठता है कि लिओनार्दो दा विंची की दोनों तस्वीर में असली ‘लिसा जिओकोंडो (मोना लिसा)’ कौन है।

तो दोस्तों साफ़ है कि लिओनार्दो डा विन्ची ने जो पहली तस्वीर बनाई थी। वह ही असली ‘लिसा जिओकोंडो (मोना लिसा)’ हैं क्योंकि लिसा जिओकोंडो के जीवन के बारे में बहुत सारी जानकारी मौजूद हैं। उनका जन्म 1479 में हुआ था और राफेल ने इनकी तस्वीर 1504 में बनाई थी। मतलब यह तो साफ है कि लिओनार्दो दा विंची ने यह पेंटिंग 1504 से पहले ही बनाई होगी।   

आप ‘लिसा जिओकोंडो (मोना लिसा)’ के जन्म से समझ सकते है कि 1504 तक उनकी उम्र 25 वर्ष से कम रही थी। अभी आप एक बार फिर से दोनों पेंटिंग पर नजर डालकर देखये। कौनसी पेंटिंग आपको 25 वर्ष से कम की लग रही है। बिलकुल साफ़ है पहली वाली क्योंकि दूसरी पेंटिंग में उम्र लगभग 35 से 40 वर्ष दिखती है। मतबल यहाँ बिलकुल साफ़ हो जाता है कि पहली वाली पेंटिंग की असली ‘मोना लिसा (लिसा जिओकोंडो)’ है।

पास्कल अंत में कहते हैं कि लिओनार्दो दा विंची ने यह पेंटिंग ‘फ्रांसेस्को डेल जिओकोंडो’की पत्नी लिसा जिओकोंडो की बनाई थी और इन्होने यह पेंटिंग ‘फ्रांसेस्को डेल जिओकोंडो’ और उसके परिवार को कभी भी नहीं दिया और अपने पास ही रखा। और उसी के ऊपर उन्होंने वह पेंटिंग बना दी जिसे आज हम देखते हैं।   

तो अब आखिरी सवाल यह उठता है कि ‘लोउव्रे म्यूजियम’ रखी पेंटिंग किसकी है? जिसे सारी दुनिया सदियों से ‘मोना लिसा’ समझती आ रही है।

फ्रेंच वैज्ञानिक पास्कल का मानना है कि यह लिओनार्दो दा विंची के द्वारा बनाई हुई एक ‘इमेजिनरी लेडी’ है। यह कोई असली औरत नहीं है।

इन ग्राउंड लेवल पर हुई डिस्कवरियों पर ‘लोउव्रे म्यूजियम’ ने कुछ भी कहने से साफ़ इनकार कर दिया है।

‘लोउव्रे म्यूजियम’ में रखी ‘मोना लिसा’ की पेंटिंग के बारे में कुछ विचार-विमर्श करते हैं। लिओनार्दो दा विंची इतने जीनियस थे कि किसी की भी पेंटिंग बहुत ही आसानी से बना सकते थे। सिवाय अपनी माँ के क्योंकि विंची को उनकी माँ ने बचपन में ही छोड़ दिया था।  

विन्ची के बारे में कहा जाता है कि वह अपने पिता की नाजायज औलाद थे और इसी कारण इनके माँ के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिलती है। तो दोस्तों हम कह सकते हैं कि विन्ची ने इस पेटिंग में अपनी माँ का काल्पनिक चित्र बनाया था। और इन्होने इस पेंटिंग (Monalisa image) में अपने फेसिअल एक्स्प्रेसन को भी मिला दिया था। इसी कारण एक्सपर्ट कहते हैं कि उन्हें इस पेंटिंग में लिओनार्दो दा विंची का चेहरा नजर आता है।    

लिओनार्दो डा विन्ची की पेंटिंग का ज्यादातर थीम ‘माँ और बच्चे’ होते थे। उन सभी पेंटिंग में माँ के चेहरे पर बच्चे के प्रति मुस्कान होती थी। और ठीक वही मुस्कान हम ‘मोना लिसा’ की तस्वीर में देख सकते हैं। जिसे हम रहस्यमयी मुस्कान कहते हैं। लिओनार्दो दा विंची की पेटिंग्स में सभी औरते अपने बच्चों की तरफ देख कर मदरली एक्स्प्रेसन बना रही हैं सिवाय ‘मोना लिसा’ पेटिंग के क्योंकि यह पेंटर की तरफ देखकर मदरली एक्स्प्रेसन बना रही हैं और पेंटर कौन है? उनका बेटा लिओनार्दो डा विन्ची।  

यह सभी थ्योरीज हैं, जो हमेशा हमें सोचने पर मजबूर करती हैं। दोस्तों हमने इस लेख को लिखने से पहले बहुत सारे आर्टिकल्स, वीडियोस और किताबों आदि से इन्स्पिरेशन और रिसर्च करने के बाद ही मोना लिसा की पेंटिंग | Monalisa painting in hindi से जुड़ा लगभग हर एक पहलू आप लोगों के ज्ञान के लिए पब्लिश किया है।

निष्कर्ष: Conclusion

तो बस इस लेख में इतना ही जिसमे हमने मोना लिसा की पेंटिंग | Monalisa painting in hindi के अलावा Monalisa painting facts in hindi, Monalisa painting price और Monalisa painting ki kimat को भी बताया है। यदि इस लेख से सम्बंधित आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो हमें नीचे कमेंट करके जरूर बताएँ।    

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