परमाणु बम का आविष्कार किसने और कब किया था

महान वैज्ञानिक ‘सर स्टीफन हॉकिंग’ ने कहा था कि इस दुनिया का विनाश भविष्य में तीन चीजों से होना लगभग तय है। जिसमे पहला जलवायु परिवर्तन, दूसरा आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस और तीसरा परमाणु युद्ध से होगा। जिसमे पहले दो विकल्प केवल सम्भावना ही लगते हैं। लेकिन परमाणु युद्ध हुआ तो जन-जीवन पूरी तरह से नष्ट हो ही जायेगा। इसीलिये हम यहाँ परमाणु बम का आविष्कार किसने और कब किया था’ की चर्चा करने करने जा रहे हैं।  

हम उम्मीद करते हैं कि आप इस लेख को अंत तक पढकर परमाणु बम के बारे में रोचक तथ्यों को जरूर जानना चाहेंगे।

बता दें परमाणु बम का इस्तेमाल पहली और आखिरी बार अमेरिका ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान के दो शहर ‘हिरोशिमा और नागासाकी’ पर किया था। जिसमे इतनी भयंकर उर्जा उत्सर्जित हुई थी कि लाखों लोगों की जान पलक झपकते ही चली गई थी। यह इतना भयानक मंजर था कि जिसकी कल्पना करना भी बहुत डरावना है। इस हमले के कुछ दिन बाद ही जापान ने आत्म-समर्पण कर दिया था और 6 साल से चल रहा दूसरा विश्व युद्ध कुछ ही सप्ताह में समाप्त हो गया था।

परमाणु बम का आविष्कार किसने और कब किया था

दुनिया के सबसे पहले परमाणु बम (Atom bomb) का आविष्कार अमेरिकन वैज्ञानिक जुलियस रॉबर्ट ओपनहाइमर (Julius Robert Oppenheimer) की देख-रेख में हुआ था। सबसे पहले परमाणु बम का परिक्षण दिनांक 16 जुलाई, 1945 में लोस एलामोस (Los Alamos), न्यू मैक्सिको (New Mexico) के एक रेगिस्तानी इलाके में किया गया था। जिस जगह का नाम THE TRINITY SITE रखा गया था।

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Jr. Robert Oppenheimer

इस परमाणु बम का पहला परिक्षण ही सफल रहा था। इस परिक्षण के बाद परमाणु बम की क्षमता (शक्ति) देख मीलों दूर बैठे रॉबर्ट ओपनहाइमर खुद डर गए और उन्होंने दबी आबाज में अपने चिल्लाते हुए साथी वैज्ञानिकों से कहा कि यह हथियार दुनिया में तबाही ला सकता है। वहां बैठे वैज्ञानिक बताते हैं कि मानो सूरज धरती पर उतर आया था। जिसका प्रभाव लगभग 16 किलोमीटर तक देखा जा सकता था।

सयुंक्त राज्य अमेरिका के परमाणु बम बना लेने के बाद अन्य देशों में इस ताकतवर हथियार को बनाने की मानों होड़ ही लग गई। 2020 के अनुसार प्रथ्वी पर हजारों परमाणु बमों की संख्या हैं। जिनमे से कुछ ही पूरी मानव सभ्यता का सफाया करने के लिए काफी हैं। हालाँकि सभी परमाणु सक्षम देशों ने नए परमाणु बम (Atom Bomb) बनाने पर संधि कर ली और पूरी दुनिया में यदि कोई भी देश परमाणु बम बनाकर उसका परिक्षण करता है तो उस पर कई प्रतिबन्ध लगा दिए जायेंगे। इसी कारण 90 के दशक के बाद नार्थ कोरिया को छोड़ किसी भी देश ने परमाणु बम का परिक्षण नहीं किया है।

परमाणु बम बनने की पूरी कहानी – All story of making Atom bomb in Hindi

परमाणु बम बनाने की शुरुआत कैसे हुई थी?

1934 मे इटालियन वैज्ञानिक एनरिको फर्मी (Enrico Fermi) ने न्यूट्रोन के साथ यूरेनियम पर बमबारी कर कुछ ऐसे नए तत्वों का निर्माण किया जो हल्की बमबारी के लिए उपयोग किये जा सकते थे।

इसके बाद सन 1938 में जर्मनी के ओट्टो हाह्न (Otto Hahn) और डॉ0 फ्रिट्ज स्ट्रेसमेन (Dr. Fritz Strassman) ने न्यूट्रोन बमबारी द्वारा यूरेनियम न्यूक्लीअस के विखंडन की खोज कर ली और उसी समय परमाणु बम बनाने की कोशिश की गई।  

बता दें “परमाणु बम (एटम बम) के अंदर उर्जा प्लुटोनियम या यूरेनियम जैसे भारी तत्वों के ‘नाभिकीय विखंडन’ से उत्पन्न होती है और नाभिकीय विखंडन’ इन दोनों प्रकार की नाभिकीय अभिक्रियाओं के सम्मेलन से बनते हैं

परमाणु बम Atom Bomb क्यों बनाया गया था?

परमाणु बम बनने की कहानी सन 1939 को दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के तानाशाह अडोल्फ़ हिटलर के कारण हुई थी जो दुनिया जीतना चाहता था। क्योंकि जर्मनी के वैज्ञानिकों ने सबसे पहले परमाणु स्प्लिट कर लिया था। जिससे कि वह न्यूक्लियर बम बना सकते थे और दूसरे विश्व युद्ध को भयानक विस्फोट से आसानी से ख़तम कर जीत सकते थे।

इसी कारण अमेरिकियों को डर था कि जर्मनी ने सबसे पहले परमाणु बम तैयार कर लिया तो अडोल्फ़ हिटलर इसका इस्तेमाल करने से बिलकुल भी नहीं कतरायेगा।  

क्योंकि 1933 में डॉ0 लियो स्ज़िलार्ड (Leo Szilard) ने सबसे पहले ‘न्यूक्लियर चैन रिएक्शन थ्योरी’ प्रस्तावित की थी। और उन्हें भी डर था कि शायद जर्मन भी एटम बम पर काम कर रहे होंगे। इसी कारण उन्होंने राष्ट्रपति फ्रेंक्लिन डी. रूज़वेल्ट (Franklin D. Roosevelt) को आगाह करने के लिए पत्र लिखा था। उस पत्र को राष्ट्रपति ने बहुत ही गंभीरता से लिया और एक प्रोजेक्ट की मांग कर दी, जिसका नाम ‘दी मेनहेटन प्रोजेक्ट’ रखा गया था।

जापानी सैनिकों ने 7 दिसम्बर, 1941 को अमेरिकी बेस-कैंप पर्ल हारबर (Pearl Harbour) पर हमला कर दिया। इसके बाद 9 जनवरी, 1942 को राष्ट्रपति ने आधिकारिक तौर पर इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी। जिसमे एक लक्ष्य निर्धारित किया गया कि 1000 दिन में एक एटोमिक बम की निर्माण किया जायगा जो दूसरे विश्व युद्ध को आसानी से ख़तम कर देगा। 

इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व करने लिए जनरल लेस्ली ग्रोव्स ( Lt. General Leslie Groves) का चुनाव किया गया। ग्रोव्स ने बिना देरी किये अपनी सभी तैयारियाँ शुरू कर दी।  

जनरल लेस्ली ग्रोव्स ने सबसे पहले जुलियस रॉबर्ट ओपनहाइमर (Jr. Robert Oppenheimer) को ‘एस अ साइंटिफिक डायरेक्टर’ भर्ती किया जोकि बहुत ही इंटेलीजेंट वैज्ञानिक थे। डायरेक्टर का चुनाव करने के बाद ग्रोव्स के पास सबसे बड़ा यह सवाल था कि इस प्रोजेक्ट को कहाँ सेटअप किया जाये जिससे कि ज़र्मनियों को इसके बारे में बिलकुल भी पता न चले।

इसके बाद ग्रोव्स ने सोचा कि इस प्रोजेक्ट को ऐसी जगह बनायेंगे जहाँ देश के बेहतरीन माइंडस एक ही साथ काम कर सकें। आखिरकार काफी सोच-विचार के बाद लॉस एलामोस (Los Alamos) में जगह का चुनाव कर लिया गया और कुछ ही महीनों में वहां बिल्डिंग भी तैयार कर दी गई थी।

शुरूआत में कर्नल ग्रोव्स और रॉबर्ट ओपनहाइमर को लगा कि इस प्रोजेक्ट में उन्हें 30 वैज्ञानिक और 100 कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। लेकिन धीरे-धीरे इस प्रोजेक्ट में लोग बढ़ते रहे और अंत में इस प्रोजेक्ट में लगभग 6000 लोग काम कर रहे थे। इसमें ओपनहाइमर का काम था कि वह बेहतरीन वैज्ञानिकों की टीम तैयार करें। इसके बाद ओपनहाइमर ने दुनिया के बेस्ट साइंटिस्ट की टीम तैयार करी। उस प्रोजेक्ट में एक वक़्त ‘6 नोबेल प्राइज विजेता’ भी काम कर रहे थे। 

इस प्रोजेक्ट के चलते ग्रोव्स लगातार परेशान थे कि कहीं जर्मनी भी तो परमणु बम पर काम तो नहीं कर रही है। और इसी के चलते कर्नल ग्रोव्स ने जर्मन वैज्ञानिकों को मारने के लिए कई सारे ऑपरेशन्स भी कंडक्ट करवाये थे।

ग्रोव्स इस प्रोजेक्ट (The Manhattan Project) को गुप्त रखना चाहते थे। इसी कारण उन्होंने सभी वैज्ञानिकों को नकली नाम दिए और उनको एक ही पोस्ट-ऑफिस (P.O BOX – 1663) पता दिया। पोस्ट-ऑफिस में काम कर रहे कर्मचारियों को भी सक होने लगा था कि इतने सारे लैटर एक ही पते पर कैसे जाते हैं? इन्ही के चलते इस प्रोजेक्ट के बारे में बहुत सारी अफवाहे फ़ैल गईं कि यहाँ पनडुब्बियाँ रिपेयरिंग करने का काम होता है और कुछ का कहना था कि यहाँ गर्भवती औरतों का सेण्टर है। इसके बाद ग्रोव्स ने कुछ लोगों को नौकरी पर रखा जिससे कि वह सब यह झूटी अफवाहें फैलाएं कि यहाँ ‘इलेक्ट्रिक राकेट’ बनाने पर काम किया जा रहा है।

इस प्रोजेक्ट में वैज्ञानिक 14-14 घंटे काम करते थे और उनके तनाव को मुक्त करने के लिए इजाजात दी गई कि वह अपनी पत्नियों को इस प्रोजेक्ट में ला सकते हैं। जिसके बाद बहुत से वैज्ञानिकों की बीबीयां वहां टेलीफ़ोनिक, टीचिंग और क्लर्क आदि का काम करने लग गई थीं।

इस प्रोजेक्ट में वैज्ञानिकों का कई सारे केमिकल्स के साथ काम करना बहुत ही ख़तरनाक था। जिसके चलते इस प्रोजेक्ट में कई जानें भी गई थीं। क्योंकि जनरल ग्रोव्स पर ‘एटॉमिक बम का परिक्षण’ करने का बहुत अधिक दबाब था। इसके बाद जल्द ही न्यू मक्सिको के एक रेगिस्तानी इलाके में जगह का चुनाव कर लिया गया। जिसका नाम THE TRINITY SITE रखा गया था।

जनरल लेस्ली ग्रोव्स ने सभी वैज्ञानिकों को 16 जुलाई, 1945 की सुबह परिक्षण के लिए तैयार होने के लिए कहा। जिसमे जुलियस रॉबर्ट ओपनहाइमर ने सभी तैयारियों को शुरू कर दिया। जिसमे कई वैज्ञानिकों ने कहा था कि यह चलेगा ही नहीं और कुछ बोल रहे थे कि यदि ये चला तो वायुमंडल में भी आग लगा देगा।

परमाणु बम (Atom bomb) अपने पहले ही परिक्षण में सफल रहा था। जिसमे कई वैज्ञानिक चिल्ला रहे थे और कई भावुक हो गए थे। इन्ही के बीच दबी सी आवाज में ओपनहाइमर ने कहा कि यह बम युद्ध के मैदान में तबाही ला सकता है। बम का प्रभाव लगभग 16 किलोमीटर तक देखा जा सकता था। वैज्ञानिक बताते हैं कि ऐसा लग रहा था कि मानो सूरज धरती पर उतर आया हो।

इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य यह था कि जर्मनी से पहले परमाणु बम बना लिया जाये और ऐसा हो भी गया। लेकिन लगभग 2 महीने पहले ही 30 अप्रैल, 1945 को हिटलर मर चुका था और उसकी मौत के 7 दिन बाद 7 मई, 1945 को जर्मनी ने पहले ही आत्म-समर्पण कर दिया था।

तो सवाल यह था कि क्या अब बम का इस्तेमाल जापान पर करना है? जो हार मानने का नाम ही नहीं ले रहा था। वैज्ञानिक परमाणु बम की शक्ति को देख इस बम को किसी भी देश पर इस्तेमाल करना नहीं चाहते थे। लेकिन अमेरिकन आर्मी ने उनकी एक न सुनते हुए कहा कि अभी ‘पर्ल हारबर बेस-कैंप’ के घाव पूरी तरह से नहीं भरे हैं। 

6 अगस्त, 1945 को अमरीका ने अपने B29 जहाज जिसका नाम ENOLAGAY था। अपना पहला परमाणु बम (Little Boy) हिरोशिमा पर दाग दिया। इस बम ने पूरे शहर कुछ ही सेकंड्स में तबाह कर दिया। जिसमे लाखों लोगों की पलक झपकते जान चली गई।

हिरोशिमा पर इतनी भयानक तबाही होने के बाबजूद जापानी आर्मी ने सरेंडर करने से मना कर दिया और उन्होंने कहा कि सरेंडर शब्द हमारी डिक्शनरी में ही नही है।

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इन सब चीजों को देख अमेरिकी आर्मी ने तीन दिन बाद 9 अगस्त, 1945 को अपना दूसरा परमाणु बम (Fat Man) जापान के दूसरे शहर नागासाकी पर छोड़ दिया। इसके भयानक मंजर को देख जापान ने थोड़े दिनों बाद 2 सितम्बर, 1945 को पूरी तरह से आत्म-समर्पण कर दिया और 6 साल से चल रहा दूसरा विश्व युद्ध कुछ ही सप्ताह में ख़तम हो गया था।

इसे भी जाने: रहस्यों से भरे दुनिया के सात अजूबे कौन-कौन से हैं?

दोस्तों हमने इस लेख को लिखने से पहले बहुत सारे आर्टिकल्स, वीडियोस और किताबों आदि से इन्सपिरेशन और रिसर्च करने के बाद ही ‘परमाणु बम का आविष्कार किसने और कब किया था’ से जुड़ा लगभग हर एक पहलू आप लोगों के ज्ञान के लिए पब्लिश किया है।

कितने देशों के पास परमाणु हथियार हैं?

विश्व प्रसिद्ध रिसर्च इंस्टिट्यूट STOCKHOLM INTERNATIONAL PEACE RESEARCH INSTITUE’ के मुताबिक 2020 में कुल 9 देशों के पास परमाणु शक्तियाँ है। लेकिन ज्यादातर देश अपनी परमाणु क्षमता को गुप्त ही रखते हैं।

क्र.देश कुल परमाणु हथियार परिक्षण दिनांक
1 यूनाइटेड स्टेट 5 800 16 जुलाई, 1945
2 रूस 6 375 29 अगस्त, 1949
3यूनाइटेड किंगडम 215 3 अक्टूबर, 1952
4फ्रांस 290 13 फरबरी, 1960
5चीन 320 16 अक्टूबर, 1964
6भारत 150 18 मई, 1974
7पाकिस्तान 160 28 मई, 1998
8इजराइल 90 1960 – 1979
9उत्तर कोरिया (30-40)9 अक्टूबर, 2006

इन सभी 9 देशों के अलावा न्यूक्लियर शक्ति शेयर करने वाली 4 देशों का एक समूह है। जिनमे जर्मनी, इटली, टर्की और बेल्जियम देश शामिल हैं। इन सभी देशों को मिलाकर इनके पास तकनीक और परमाणु हथियार बनाने के लिए उपयुक्त सामग्री भी मौजूद है। यह चारों देश मिलकर इसका निर्माण कर सकते हैं और जिसे आवश्यकता हो वह उसका इस्तेमाल कर सकता है। 

तो बस इस लेख में इतना ही जिसमे हमने ‘परमाणु बम का आविष्कार किसने और कब किया था’ के अलावा ‘परमाणु बम बनने की पूरी कहानी’ और ‘कितने देशों के पास परमाणु हथियार हैं?’ को भी बताया है। यदि इस लेख से सम्बंधित आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो हमें नीचे कमेंट करके जरूर बताएँ।

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