मच्छर कैसे पैदा होते हैं | Mosquito in hindi

नमस्कार दोस्तों, क्या आपको पता है कि मच्छर कैसे पैदा होते हैं | Mosquito in hindi और कैसे यह इंसानों को प्रभावित करते हैं? जिस कारण हर कोई मच्छरों से छुटकारा पाना चाहता है। वैसे तो मच्छरों के बारे में हर कोई भली-भांति जानकारी रखता है लेकिन इस लेख में आप मच्छरों से जुडी रोचक जानकारी को विस्तार से पढेंगे।

इसके अलावा, इस लेख के अंत तक आप दुनिया के सबसे हानिकारिक कीट मच्छर कैसे पैदा होते हैं | Mosquito in hindi के अलावा मच्छर क्यों काटते हैं? मच्छर कितने प्रकार के होते हैं? मच्छर से बचाव जरूरी क्यों है? मच्छर भगाने के कुछ उपाय और इस विषय से जुड़े बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न भी जानने वाले हैं तो हमें पूरी उम्मीद हैं कि आप इस आर्टिकल को आखिर तक पढ़कर अपनी जानकारी को जरूर बढ़ाएंगे।

बता दें कि मच्छर इकलौता एवं सबसे जानलेवा जीव-जंतुओं में से ऐसा कीट (Insect) है जोकि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा इंसानों की म्रत्यु का मुख्य कारण बनता है, मतलब मच्छरों के द्वारा हर साल लाखों लोगों की जान चली जाती है। इसका अन्य कारण यह भी है कि मच्छर पूरी दुनिया में हर-स्थान पर बहुत अधिकता में पाए जाते हैं।

व्यक्तिगत तौर पर आपने गौर (नोटिस) किया होगा कि जब मौसम में बदलाव होता है तब मच्छरों की संख्या अचानक से बहुत अधिक बढ़ जाती है। जिस कारण लोग मच्छरों से बुरी तरह से प्रभावित या परेशान हो जाते हैं। इसके अलावा मौसम में अधिक गर्मी या फिर अधिक शर्दी होने के कारण मच्छरों की संख्या बहुत कम भी हो जाती है।

मच्छर कैसे पैदा होते हैं | Mosquito in hindi

यदि मच्छर के पैदा होने या मच्छर के बनने की बात करें तो यह मादा-मच्छर के द्वारा अंडे देने से पैदा होते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार मादा-मच्छर (Female Mosquito) एक बार में लगभग 100 से 300 अंडे दे सकती है। इसी कारण मच्छर के अंडे एक स्थान पर एक साथ बहुत अधिक संख्या में पाए जाते हैं। इसके अलावा बता दें कि एक मादा-मच्छर अपने पूरे जीवन-काल में तीन बार प्रजनन कर अंडे दे सकती है।

आपको पता है कि नर-मच्छर मादा-मच्छरों को उनके पंखों की आवाज से पहचान लेते हैं। इसके अलावा एक मच्छर के जीवन-चक्र या लाइफ-साइकिल में 4 चरण होते हैं; जिसमे वह पैदा होने से लेकर भोजन इत्यादि करने के साथ अगली पीढी के लिए बच्चे पैदा करके मर जाते है। यह 4 चरण अंडे (Eggs), डिम्बक (Larva), कोशित (Pupa) एवं प्रौढ़ (Adult) होते हैं।

पहले चरण में मच्छर का जीवन अंडो (Eggs) के द्वारा शुरू होता है जोकि जलाशयों, ताल, नाले-नालियों एवं झीलों आदि के पानी की सतह पर पाए जाते हैं। इसके अलावा मादा-मच्छर साफ़ पानी की सतह पर भी अंडे देती है जोकि डेंगू की बीमारी का मुख्य कारण बनते हैं। इनके अलावा मादा-मच्छर नमी-युक्त जमीन पर घरों के आसपास भी अंडे देती हैं। मादा-मच्छर को अंड-समूह बनाने के लिए अधिक मात्रा में प्रोटीन एवं न्यूट्रीशियन की आवश्यता होती है जोकि वह इंसानी रक्त (रक्त) से पूरा करती है।

दूसरे चरण में मच्छर के अंडे से 4-14 दिन में अगली अवस्था यानिकि डिम्बक (Larva) में आ जाते हैं जोकि अंडो से कुछ ही घंटों में बाहर निकल आते हैं। डिम्बक पानी की सतह पर तैरते हैं और एक विशिष्ट साइफन (Siphon) नली के माध्यम से साँस लेते रहते हैं (यह साँस लेने की प्रक्रिया अलग-अलग प्रकार की मच्छरों की प्रजाति में अलग-अलग प्रकार से हो सकती है।) और यह गले हुए पदार्थों से भोजन करते रहते हैं।

इसके कुछ सप्ताह बाद यह मच्छर कोशित (Pupa) में परिवर्तित हो जाते हैं और इस अवस्था में मच्छर भोजन नहीं करते हैं। लेकिन धीरे-धीरे 2-7 दिन में मच्छर चौथे चरण यानिकि प्रौढ़ (Adult) अवस्था में परिवर्तित हो जाते हैं जोकि उड़ने लग जाते हैं।  

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मच्छरों की अलग-अलग प्रजाति में यह जीवन-चक्र अलग-अलग होता है जोकि 4-5 दिनों से लेकर 1 महीने तक कभी भी पूर्ण हो सकता है।  

मच्छर खून क्यों पीते हैं – Why do mosquitoes drink the blood

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केवल मादा-मच्छर (Female Mosquito) ही इन्सान का खून पीती हैं या इन्सान को काटती है जोकि अपने बजन का तीन गुना रक्त (ब्लड) पी सकती है। मादा मच्छर के रक्त पीने का मुख्य कारण यह है कि जब मादा-मच्छर नर-मच्छर से प्रजनन करती है तो उसे अपने बच्चों के भविष्य के लिए अपने अंडो को प्रोटीन आदि की आवश्यकता होती है जोकि वह इंसानी-रक्त या कुछ जानवरों के रक्त से प्राप्त करती है। इसलिए केवल मादा-मच्छर ही इंसानों को काटती है ताकि वह अपने अंडों को पूर्णरूप से विकसित करने की क्षमता प्राप्त कर सके।

बता दें कि मादा-मच्छर मानव-शरीर के जिस भी अंग से खून पीती है; उस स्थान पर वह थूककर सुन्न कर देता है। इसके बाद मादा-मच्छर अपने तीखी सूड (इंजेक्शन की जैसी निडिल) को खून की तलाश में इंसानी-अंग में एंटर कर देती है। इसके ठीक बाद मादा-मच्छर के काटने से पहले वह अपनी लार (Saliva) को भी काटने वाले स्थान पर इंजेक्ट कर देती है; जिससे कि खून की क्लोटिंग मच्छर की सूंड (Proboscis) के आसपास इकठ्ठा न हो सकें ताकि मच्छर आसानी से खून पी सके।

कई वैज्ञानिक अपनी खोजों के आधार पर बताते हैं कि मच्छर अपने शुरूआती समय में इंसान या जानवरों का खून नहीं पीते थे। वह कहते हैं कि यह बदलाव इनमे धीमे-धीमे आया था और इसका मुख्य कारण यह था कि मच्छर सूखे मौसमों (सूखे प्रदेशों) में रहने लगे जहाँ उन्हें प्रजनन के लिए पानी या नमी-युक्त स्थान की जरूरत होती थी। और इसी कारण मच्छरों ने इंसानों और जानवरों का खून चूसना शुरू कर दिया था।

इसके विपरीत नर-मच्छर (Male Mosquito) खून नहीं पीते हैं। लेकिन कई खोजकर्ता बताते हैं कि नर-मच्छर पानी और नमी वाली जगह पर जीवित रह सकते है। इसी कारण इन्हें रक्त पीने की कोई आवश्यता नहीं है। इसके अलावा कई खोजों से ज्ञात हुआ है कि कुछ मामलों में सूखे में रहने वाले नर-मच्छर अधिक आक्रामक होते हैं और मादा-मच्छरों की तुलना में अधिक फ्रीक्वेंटली खून पीते हैं। इस मामले के अलावा लगभग सभी नर-मच्छर पानी और नमी के कई श्रोतों (पेड-पौधों और फल-फूलों का रस आदि) से अपने लिए सम्पूर्ण भोजन प्राप्त कर लेते हैं।

मच्छर कितने प्रकार के होते हैं – All types of Mosquito in hindi   

यदि मच्छरों के प्रकार या प्रजातियों (Species) की बात करें तो इनकी दुनियाभर में लगभग 3000 प्रकार की स्पीशीज पायी जाती हैं। जिनके द्वारा लगभग 7 लाख लोगों की हर वर्ष जान चली जाती है।

इन प्रजातियों के अलावा मच्छरों की 200 प्रजातियां ही हैं जोकि इंसानों और जानवरों का खून चूसती हैं। इनके अलावा मलेरिया फ़ैलाने वाले अनोफील्स मच्छरों (Anopheles Mosquitoes) की 460 प्रजातियों में से सिर्फ 5 प्रकार की प्रजातियाँ ही इंसानों के लिए ख़तरनाक हैं। यदि इन प्रजातियों या स्पीशीज को छोड़ दिया जाए तो बाकी के मच्छर तो इंसानों के लिए अच्छे ही हैं।

जैसे कि वैज्ञानिकों के सौध-पत्रों के अनुसार मच्छरों की अनैकों प्रजाति हैं, लेकिन आपको जानकार खुशी होगी कि मच्छरों की सभी प्रजाति इंसान का खून नहीं पीती हैं। वह दूसरी चीजें (पेड-पोधों, फूल-पट्टी एवं फल आदि का रस) खाकर जीवित रहती हैं।

इसके अलावा पूरी दुनिया में आइसलैंड इकलौता ऐसा देश है जहाँ एक भी प्रकार के मच्छर की प्रजाति (स्पीशीज) नहीं पायी जाती है क्योंकि आइसलैंड एक ठंडा एवं बर्फीला देश है।  इसके अलावा आइसलैंड के बदलते रहते मौसम के कारण मच्छरों के पैदा होने की लाइफ-साइकिल पूरी नहीं हो पाती है जोकि आप उपर्युक्त लेख में पढ़ चुके हैं कि यह साइकिल 4 चरणों के साथ कई सप्ताह में पूर्ण होनी होती है।

मच्छर से बचाव जरूरी क्यों

मच्छरों से बचाव करना बहुत आवश्यक है क्योंकि यह खून चूसने वाले मच्छर सिर्फ परेशान ही नहीं करते वल्कि सेहत के लिए अनैकों प्रकार की बीमारी फ़ैलाकर गंभीर खतरा पैदा करते हैं। जिसके कारण लाखों लोगो को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।

यदि मच्छरों से फैलने वाली कुछ बीमारियों की बात करें तो यह मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू, जीका वायरस एवं पीला बुखार आदि बीमारियां फैलाते हैं।  

मच्छर भगाने के उपाय

यदि मच्छर भगाने के उपायों की बात करें तो इसके अनैकों प्रकार हैं। इसके अलावा कहीं न कहीं हर व्यक्ति मच्छरों से परेशान होकर सोचता है कि काश सभी मच्छर हमेशा के लिए ही ख़तम हो जाएँ। लेकिन यह करना असंभव है और हमें यह करना भी नहीं चाहिए क्योंकि प्रकृति से छेड़-छाड़ करना इंसानी-सभ्यता को बहुत मेंहगा पड़ सकता है। इसके अलावा दुनियाभर में अनैकों संस्थाएँ मच्छरों से निपटने के लिए कार्यरत हैं। जिनमें AMCA यानिकि ‘दी अमेरिकन मोश्कीटो कंट्रोल एसोसिएशन’ प्रमुख है।  

यदि आप मच्छर भगाने के घरेलू उपाय इंटरनेट पर सर्च करेंगे तो आपको अनैकों प्रकार के घरेलू नुस्खे मिल जायेंगे। इनके अलावा मच्छरों को भगाने के लिए बाज़ार में कई प्रकार की कीटनाशक दवाएं (ओडोमॉस, मोर्टीन, ऑल-आउट आदि) उपलब्ध और रात को सोने के लिए ज्यादातर लोग मच्छरदानी का प्रयोग भी करते हैं।

इसे भी पढ़ें: ग्लोबल वॉर्मिंग क्या होता है?

मच्छरों से जुड़े रोचक तथ्य – Interesting facts about mosquito in hindi

  • दुनिया में मौजूद सभी प्रकार के मच्छरों में से केवल मादा-मच्छर ही इंसानों और जानवरों को काटती हैं और उनका रक्त (ब्लड) पीती हैं।  
  • मच्छर पूरी दुनिया में इकलौता ऐसा कीट (जीव) है; जिस पर वैज्ञानिकों द्वारा सबसे ज्यादा सौध किया जा चुका है। इसके अलावा यह अकेला प्राणी (कीट) है जोकि सबसे ज्यादा इंसानी-मौतों का ज़िम्मेदार है।
  • हम अक्सर सुनते या बोलते हैं कि मच्छर कान के पास आकर भिन-भिनाता है, लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है क्योंकि मच्छर हमारे मुँह और नाक से निकलने वाली कार्बनडाई ऑक्साइड गैस की ओर आकर्षित होता है। इसके अलावा मानव-शरीर से निकलने वाली गंध और गर्मी भी मच्छरों को अपनी ओर आकर्षित करती है।  
  • मच्छर दिन में सो जाते हैं या फिर हम कह सकते हैं कि दिन में सूरज की गर्मी से डीहाईड्रेट होने के डर से नमी-नुमा जगह पर छुपे रहते हैं और शाम होते ही बाहर निकल आते हैं। और घरों की खिड़कियों, झरोखे, एवं अन्य खुली जगहों से घरों के अन्दर गुस जाते हैं।
  • प्रत्येक वर्ष मच्छरों के काटने से फैलने वाली बामारियों के कारण लाखों लोगों की जान चली जाती है। इसके अलावा कुछ विशेषज्ञ बताते हैं कि प्राचीन काल में नदियों के किनारे बसीं सभ्यताओं के विनाश का मुख्य कारण मच्छरों के द्वारा फैली बीमारियाँ ही थीं।

FAQ – बार बार पूछे जाने वाले प्रश्न


Q. 1 – मच्छर की आयु कितनी होती है? | मच्छर कितने दिन जिंदा रहता है?

यदि मच्छर की आयु की बात करें तो मादा-मच्छर कई सप्ताह (2-3) तक जीवित रह सकती है तो वहीं नर-मच्छर मादा-मच्छर से मिलने (मिलन) के बाद कुछ दिनों (4-5) तक ही जिंदा रहता है।  

Q. 2 – मच्छर एक बार में कितने अंडे देता है?

एक मादा-मच्छर एक बार में 100 से 300 एक साथ दे सकती है।   

Q. 3 – मच्छर क्या खाते हैं?

मादा-मच्छर इंसानों और जानवरों का खून पीते हैं तो वहीं नर-मच्छर पेड-पौधे एवं फल-फूल का रस चूसकर जीवित रहते हैं।

Q. 4 – मच्छर खून क्यों पीते हैं?

केवल मादा-मच्छर ही खून पीती है जोकि अपने अंड-समूह बनाने के लिए अधिक मात्रा में प्रोटीन एवं न्यूट्रीशियन की आवश्यता होती है। इसी कारण मच्छर खून (ब्लड) पीते हैं।

Q. 5 – मच्छर किसे ज्यादा काटते हैं?

यदि बात करें कि मच्छर किस व्यक्ति को सबसे ज्यादा काटते हैं। इसका जबाव यह है कि कुछ लोग अपनी त्वचा से केमिकल के रूप में लेक्टिक एसिड अधिक मात्रा मे प्रोड्यूस करते हैं। इसी कारण उनकी ओर मच्छर अधिक तेजी से आकर्षित होते हैं।

निष्कर्ष – The Conclusion

इस लेख को यहाँ तक पढ़कर आपने जाना कि प्रथ्वी पर मौजूद सबसे जानलेवा एवं हानिकारक कीट मच्छर कैसे पैदा होते हैं | Mosquito in hindi और इसके अलावा मच्छर खून क्यों पीते हैं? मच्छरों के प्रकार (Types of mosquito in hindi) और मच्छरों से होने वाली बीमारियों को भी सरलतापूर्वक विस्तार से समझाने का प्रयास किया है। इस आर्टिकल से सम्बंधित आपका कोई भी सवाल या सुझाव हो तो हमें नीचे कमेंट करके जरूर बताएँ।

यदि आपको यह जानकारी पसंद आयी हो तो इसे अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और परिवार-जन के साथ Whatsapp, Facebook, Telegram आदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जरूर साझा करें।

इसे भी पढ़ें: दुनिया के सात अजूबे कौन-कौन से हैं?

This Post Has 2 Comments

  1. Molly

    Nice post. I was
    checking continuously this weblog and I’m impressed!
    Extremely helpful info specially
    the ultimate part :
    ) I handle such info a lot.
    I used to be seeking this certain info for a very long time.

    Thanks and good luck.

  2. Leonore

    Very energetic post, I liked that a lot.
    Will there be a part 2?

Leave a Reply